मऊ- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण

अतिक्रमण करने का सिलसिला सालों से अनवरत चला आ रहा ह

जनपद की सार्वजनिक पोखरियों और भीटों पर से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी पोखरियों पर से अतिक्रमण हटाने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे। हालांकि कुछ एक पोखरियों पर किए गए अतिक्रमण को प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद हटवाया भी। लेकिन इस कवायद पर फिर भी अतिक्रमणकारी भारी पड़ रहे।

कई गांवों में स्थित कम गहराई वाली पोखरियों को पाटकर अथवा उनके भीटों पर अतिक्रमण करके उस पर झोपड़ियों से लेकर पक्के मकान तक बना लिए गए हैं। संबंधित गांवों के ग्राम प्रधान वोट के चक्कर में ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई कराने के प्रति उदासीन रहना बेहतर समझते हैं। ग्राम प्रधानों के ही प्रभाव में गांवों के लेखपाल भी ग्राम पंचायतों की इन भू संपत्तियों की रक्षा के लिए आगे नहीं आते। यही वजह है कि पोखरियों पर अतिक्रमण की घटनाओं में लगातार वृद्धि होती रही है। वहीं, शहरों, कसबों और बाजारों में भी कीमती सार्वजनिक भूमि हैं। इन पर अतिक्रमण करने का सिलसिला सालों से अनवरत चला आ रहा है। प्रदेश में नई सरकार बनने पर शासन की तरफ से एक वर्ष पूर्व सार्वजनिक पोखरियों तथा सार्वजनिक जमीनों से अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया था।लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते बड़ी घोसी ब्लाक क्षेत्र का सीता कुंड पोखरा, तमसा नदी के किनारे सहित तमाम सार्वजनिक जमीनों से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। इसकी शिकायतें विभागीय पोर्टल पर भी लोगों ने की है। लेकिन इन पर कोई कार्रवाई की ही नहीं गई।नगर के पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी कहते हैं कि नगर की बेशकीमती जमीनों की रक्षा के लिए वह सालों से अभियान चला रहे हैं। कुछ स्थानों पर अतिक्रमण रोकवा पाने में वे सफल भी हुए हैं लेकिन अधिकांश स्थानों पर अतिक्रमण करने में भू माफिया कामयाब हो गए हैं। इसी प्रकार घोसी में सीताकुंड सहित कई पोखरियों पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए अरविंद पांडेय कई सालों से सक्रिय हैं। लेकिन परिणाम कुछ खास सार्थक नहीं हैं।

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