जीएसटी-आर-1 भरने की मियाद 40 से घटाकर 30 हुई दिन

शुक्रवार को जीएसटी कौंसिल ने अचानक लिए गए निर्णय में नई व्यवस्था लागू कर दी

कभी सर्व डाउन तो कभी पोर्टल के न खुलने से परेशान व्यापारियों के सामने जीएसटी कौंसिल के नए फरमान से बड़ी मुसीबत आ गई है। कौंसिल ने मासिक और तिमाही रिटर्न जीएसटी-आर-1 भरने की मियाद 40 से घटाकर 30 दिन कर दी है। अब अप्रैल माह का रिटर्न दस जून तक भरने की तैयारी में जुटे व्यापारियों को 31 मई तक रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं तिमाही रिटर्न दाखिल करने वालों को दस अगस्त नहीं बल्कि 30 जुलाई तक काम पूरा करना होगा। व्यापारी नेताओं ने अचानक लिए गए इस फैसले पर आपत्ति जताई है।

जीएसटी में 1.5 करोड़ तक की बिक्री करने वाले व्यापारियों के लिए मासिक रिटर्न भरने के लिए 40 दिन का समय मिलता था। अप्रैल की बिक्री का रिटर्न दस जून तक भरा जा सकता था। इसी तरह 1.5 करोड़ से अधिक की बिक्री करने वाले कारोबारियों के लिए भी 40 दिन की मियाद तय थी। ऐसे व्यापारी अप्रैल,मई, जून का रिटर्न 10 अगस्त तक भर सकते थे।

शुक्रवार को जीएसटी कौंसिल ने अचानक लिए गए निर्णय में नई व्यवस्था लागू कर दी।अब मासिक और तिमाही रिटर्न जीएसटी-आर-1 भरने की मियाद 40 से घटाकर 30 दिन कर दी है। साफ है कि दस दिन के समय में कटौती व्यापारियों को परेशान करेगी। इस बारे में अधिकतर व्यापारियों को अभी जानकारी ही नहीं है। शहर के साथ ग्रामीण अंचलों में व्यापार करने वालों को कौंसिल के नए निर्णयों की जानकारी समय पर नहीं हो पाती। जैसे जीसएटी आर-3 बी के तहत रिटर्न भरने वालों को सर्वर डाउन और पोर्टल न चलने के कारण 22 मई तक की मोहलत दी है। इसके बावजूद बहुत से व्यापारी रिटर्न दाखिल नहीं कर सके।

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल कल्याण समिति के प्रदेश संयोजक संतोष पनामा के मुताबिक नई व्यवस्था से व्यापारी परेशान हैं। इस तरह के फैसले लागू करने से पहले संशोधन की जानकारी दी जाए। साथ ही उसे लागू करने के लिए 30 दिन का अंतराल रहे। समिति के अध्यक्ष सतीश केसरवानी ने कहा है कि जीएसटी कौंसिल के अचानक हुए इस फैसले से भ्रम की स्थिति है। व्यापारी अभी जीसएटी आर-3 बी के तहत रिटर्न नहीं भर पाए हैं। अब उन्हें 31 मई तक दूसरा रिटर्न भरने की तैयारी करनी होगी। इससे व्यापार प्रभावित होगा।

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